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अपनी दुकानों को 30 की बजाय 99 साल तक लीज पर दे सकेगी परिषद, लेकिन कार्रवाई के लिए 15 दिन भी मुश्किल से मिलेंगे

अपनी दुकानों को 30 की बजाय 99 साल तक लीज पर दे सकेगी परिषद, लेकिन कार्रवाई के लिए 15 दिन भी मुश्किल से मिलेंगे

नगर परिषद प्रशासन ने 60 साल पहले निर्मित जिन दुकानों को किराए या लीज पर दिया गया था उनकी लीज अवधि अब 30 की बजाय 99 साल के लिए बढ़ा सकेगी। इससे एक ओर जहां ऐसे लीजधारक या किराएदारों को राहत मिलेगी वहीं नगर परिषद को भी करीब 7 करोड़ रुपए की आय प्राप्त होगी। हालांकि परिषद व दुकानदार दोनों के लिए फायदेमंद इस फैसले की राह इतनी आसान नहीं है। परिषद को विधानसभा चुनाव के बाद मुश्किल से पंद्रह दिन का समय मिलेगा जिसमें उसे बोर्ड की बैठक भी बुलानी होगी और अगर सत्ता परिवर्तन हुआ तो फैसले पर अमल टल भी सकता है। स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं संयुक्त सचिव की ओर से इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें बताया गया कि नगरीय निकायों द्वारा किराया, लाइसेंस, यूज एंड आॅक्युपेशन पर दिए गए विभिन्न व्यवसायों के लिए भूखंड, स्थल, दुकान या केबिनों को 99 वर्ष की लीज पर नियमन या विक्रय करने के संबंध में पूर्व में जारी आदेश को प्रत्याहारित करते हुए 99 वर्ष लीज पर विक्रय करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

दुकानों की लीज अवधि बढ़ाकर परिषद कमा सकती है 7 करोड़


ब्यावर. सुभाष चौक के सामने स्थित परिषद की दुकानें।

जितनी पुरानी दुकान, उतनी छूट


26 जनवरी 1950 से पूर्व के किराएदारों से वर्तमान व्यावसायिक आरक्षित दर की 25 प्रतिशत राशि एकमुश्त ली जाए। जबकि 26 जनवरी 1950 से 10 अगस्त 1983 तक की अवधि के किराएदारों से वर्तमान व्यावसायिक आरक्षित मूल्य की 50 प्रतिशत राशि, 11 अगस्त 1983 से 17 जून 1999 तक की अवधि के किराएदारों से वर्तमान व्यावसायिक आरक्षित मूल्य की 75 प्रतिशत राशि एकमुश्त ली जाए। इनके अलावा वर्तमान व्यावसायिक आरक्षित दर की 5 प्रतिशत राशि लीज किराए के रूप में प्रतिवर्ष वसूली की जाए। आठ वर्ष की राशि एक मुश्त जमा कराने पर किराया मुक्त किया जा सकेगा।

99 साल के लिए मिलेगी लीज


राज्य सरकार की ओर से पूर्व में 10 मई 2017 को जारी आदेश के तहत ऐसी संपतियों का 30 वर्ष की अवधि के लिए नवीनीकरण करने के आदेश दिए थे। मगर अब पूर्व की लीज अवधि या किराएदारी जिस दिनांक को समाप्त हुई उससे अगले 99 वर्ष के लिए नियमन किया जाएगा। भूतल पर निर्मित दुकान के प्रथम तल की छत या छत पर किए गए निर्माण का 99 वर्ष की लीज पर नियमन वर्तमान व्यावसायिक डीएलसी दर की 50% राशि पर होगा।

सबलेट की तो 50% प्रीमियम : यदि मूल किराएदार द्वारा दुकानें सबलेट कर दी गई है तो एकमुश्त वसूल की जाने वाली राशि का 50 % प्रीमियम अतिरिक्त रूप से वसूल किया जाए।

31 दिसंबर तक प्रभावी रहेंगे आदेश


99 वर्ष की लीज पर नियमन करने के आदेश 31 दिसंबर 2018 तक ही प्रभावशील रहेंगे। उक्त अवधि में नियमन नहीं कराने वाले लीज धारक किराएदार से संपत्ति खाली कराने की कार्रवाई नगर परिषद द्वारा की जाएगी। उक्त दर उन दुकानों पर लागू होगी जिनका क्षेत्रफल 40 वर्गमीटर या उससे कम है। 40 वर्गमीटर से अधिक व 75 वर्गमीटर होने पर उल्लेखित दरों से वसूल की जाने वाली राशि पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त प्रीमियम वसूल किया जाएगा।

बोर्ड की बैठक भी जरूरी


स्वायत्त शासन विभाग के इस नए आदेश की पालना के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित इस निष्पादन नीति को बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित कराकर लागू कराना होगा। ऐसा आचार संहिता के दौरान हो नहीं सकता। ऐसे में परिषद प्रशासन को चुनाव के तुरंत बाद इस पर अमल शुरू करना होगा।

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