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सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के खेलभत्ते में 8 साल बाद बढ़ोतरी

सरकारी पाठशालाओं में विभिन्न खेलकूद, साहित्य व सांस्कृतिक प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र छात्राओं के लिए खुशखबरी है। इन प्रतियोगिता में जो खिलाड़ी शामिल होंगे, उन्हें अब शिक्षण सत्र 2019-20 में बढ़ा हुआ दैनिक व खुराक भत्ता मिलेगा। इस संबंध में हाल ही में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने जारी कर दिए है। क्षेत्रीय जिला व राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता व राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को प्रतिदिन 150 रुपए के हिसाब से अब रोजाना खुराक भत्ता दिया जाएगा। पहले यह भत्ता 100 रुपए प्रति खिलाड़ी दिया जाता था। वहीं जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होने वाले खिलाड़ियों को गणवेश भत्ते में 250 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई, अब खिलाड़ियों की 750 की जगह गणवेश के लिए एक हजार रुपए तक खर्च किए जा सकेंगे। इसमें 500 रुपए विद्यार्थी वहन करेंगे तथा शेष 500 रुपए छात्र कोष से खर्च किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के खेलकूद सहित अन्य गतिविधियों में करीब 8 साल बाद भत्तों में बढ़ोतरी की गई है। 

राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ोत्तरी : राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों एवं विद्यार्थियों को प्रतियोगिता व यात्रा अवधि के दौरान खुराक भत्ते भी बढ़ाए गए है। दैनिक भत्ते के रूप में 200 की जगह अब 250 रुपए प्रति रोजाना के हिसाब दिए जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर जाने वाली टीम के भत्ते में भी बढ़ोतरी की गई है। अब एक हजार पांच सौ रुपए मिलेंगे। पहले एक हजार रुपए मिलते थे। प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में एजीएफआई की ओर से खिलाड़ियों के पंजीयन में बढ़ोतरी की गई है। खिलाड़ियों को पहले 130 रुपए देने होते थे, जिन्हें अब 200 रुपए कर दिए गए है।

शिक्षा विभाग की ओर से इन भत्तों को बढ़ाने के पीछे मानना है कि इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त विभिन्न खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिलेगा। इससे जिले से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होंगे। जो जिले व प्रदेश का नाम देश में रोशन करेंगे। सितम्बर माह से जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता शुरू होगी। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित होने वाली खेलकूद प्रतियोगिताओं में सरकारी स्कूलों के मुकाबले निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या अधिक होती है। इसका मुख्य कारण सरकारी स्कूलों साधनों की कमी होना है। ऐसे में खेल भत्ता बढ़ने से विभाग को उम्मीद है कि सरकारी स्कूलों के खिलाड़ियों की भागीदारी में बढ़ोत्तरी होगी। 

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